Vijay kaushal ji maharaj ki ram katha. आज का ब्लॉगपक्ष: Vijay Kaushal Ji Maharaj 2018-07-27

Vijay kaushal ji maharaj ki ram katha Rating: 8,2/10 1651 reviews

ram katha by vijay kaushal ji maharaj [9.6 MB]

vijay kaushal ji maharaj ki ram katha

. On our website, we have the songs, which seem attractive even to well informed music addicts. There you will find all popular musical directions. मांगों क्या मांगती हो रानी- कोप भवन से निकल के-दशरथ मनुहार करते हुए बोलते हैं। हम रघुवंशी हैं राम की कसम खाकर कहते हैं जो तुम मांगोगी वही वर दे देंगे। ठीक उसी समय कौशल्या जी आरती का थाल लेकर पूजा घर की ओर जाती हैं के आरती का थाल उनके हाथ से गिर गया यह एक बड़ा अपशकुन था। महल के द्वार तिरछे होने लगे।अयोध्या का भाग्य उससे रूठने लगा। मेरा पहला वरदान भरत को अयोध्या का राज्य।दूसरा वरदान राजन मेरा ध्यान से सुनना -तपस्वी वेश में उदासीन व्रत लेकर राम को चौदह बरस का वनवास। दशरथ जी भूमि पर गिर गये कहने लगे तुमने क्या कहा मैं ठीक से सुन नहीं पाया -दोबारा कहिये। दशरथ पत्थर की मूर्तीवत हो गए कैकई का हाथ उनके हाथ से छूट गया। बोले रानी तुझे पाप लग जाएगा -ऐसा कठोर वर मत मांग। महाराज ने कैकई के मुख पे हाथ रख दिया -मुझे पहले वरदान में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन दूसरा वरदान तुमने कैसे मांग लिया। राम से ऐसा क्या अपराध हो गया कल तो तुम कहती थी राम का अभिषेक करो हम दोनों वन में जाकर रहेंगे। मैं राम की तरफ से क्षमा मांग लूंगा। मुझे प्राण भीख में दे दो ,गऊ की हत्या मत करो मैं तुम्हारी काली गाय हूँ। कैकई धक्का दे देती है दशरथ जी को - नहीं देना था वरदान तो क्यों महादानी बनने का नाटक कर रहे थे। कटे पंख के पक्षी से महाराज चिल्ला रहे हैं हे महाकाल भगवान् ,हे शंकर भगवान् आज मुझे एक वरदान दे दीजिये मेरे बेटे से कह दो मेरी बात आज न माने। प्रात : काल सुमंत आये हैं और सारा षड्यंत्र राम को बताते हैं। कैकई के भवन में जाकर राम कैकई से पूछते हैं मुझे बताइये हमारे पिता क्यों आज इतने व्यथित हैं जिसके चार चार बेटे हों वह आज इतना दुखी क्यों हैं मुझे बताओ पिता जी के दुःख का कारण क्या है। ऐसा कौन सा दुःख आ गया जिस ने इनकी ये हालत बना दी। अगली सुबह सारी अयोध्या नगरी विलाप करने लगी। कौशल्या जी को कुछ पता नहीं है राम उनकी आज्ञा लेने जा रहे हैं वनवास की घटना बताने से पहले। सुमंत का लड़का राम जी के साथ था जिसने सारी घटना कौशल्या जी को बताई। देखो राम अगर ये बात सिर्फ तुम्हारे पिता ने कही होती ,मैं इसे इतना वजन न देती ,कैकई तेरी माता हैं अगर ये बात दोनों माँ और पिता ने कही है तो तुम जाओ। उनकी आज्ञा का पालन करो। अब जानकी जी चिंतित हो राम से पूछती हैं इस संकट के बारे में। राम कहते हैं मेरी माँ को जीवित रखना मेरे पीछे अपनी सेवा से। जानकी जी बोलीं प्रभु आपको मालूम है मैं कौन हूँ? मीरा ने कहा मैं किसी पुरुष से नहीं परमपुरुष से बात करती हूँ राणा जी क्रोध में थे ठाकुर जी को उठाया और झील में फेंक दिया। पीछे -पीछे मीरा ने भी झील में छलांग लगा दी कहते हैं इसके बाद मीरा जी और गिरधर गोपाल की वह मूरत ,दोनों मथुरा -वृन्दावन की यमुना में प्रकट हुए। साढ़े चार हज़ार वर्ष पुरानी लीलाएं मीरा को याद आने लगीं। ललिता जी राधा जी की ख़ास सखी सब कुछ पूछने लगीं -ये गोवर्धन तुम्हें याद है ये वंशीवट तुम्हें अभी भी याद है ,ये निधि वन तुम्हें याद है? गली में खेल रहा है। सुमंत को भेजते हैं राघव को बुलाइये। दशरथ भगवान् को तो चाहते हैं आवाज़ नहीं लगाना चाहते। राया तो रथ पर जाते हैं ऐसे कैसे आवाज़ लगाते हुए भागें बच्चों के पीछे। भोजन करति बोले जब राजा , नहीं आवत तजि बाल समाजा। कौशल्या जब बोलन जाईं ,. . You would possibly decide to make an experiment and discover many new artists and bands. We provides Vijay kaushal ji mharaj ki full katha's songs in formats like mp4, hd, webm, mkv, flv, wmv, 3gp, wav, mp3.

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Shri Vijay Kaushal Ji Maharaj On Hanuman Katha Day 1

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If you have not decided yet on what you need, then we recommend you using the genre classifier. वहां पहुंचकर अन्न जल लेना भी छोड़ देते हैं समस्त मेड़ता वासी -प्रायश्चित स्वरूप ,के बस किसी प्रकार मीरा जी वापस लौट आएं।मेवाड़ अपनी सुसराल। मीरा जी कहतीं हैं मैं वहां वापस नहीं आ सकती अब, जहां अधर्म हो ,साधु संतों का अपमान हो ,उदय सिंह जी के हृदय के भाव से किया गया प्रायश्चित मीरा बाई नज़रअंदाज़ नहीं कर पातीं कहने लगी है ठीक है में द्वारकाधीश जी से पूछती हूँ : बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे , मुझे दुनिया वालों से क्या काम रे । गाते हुए मीरा जी मंदिर के गर्भ गृह में पहुँच गईं हैं। और जैसे ही मीरा जी ने हाथ उठाकर कहा - मेरी बांह पकड़ लो श्याम रे. Also Anyone can download Vijay kaushal ji mharaj ki full katha's newest and oldest mp3,hd mp4 songs. तुलसीदास कहते हैं 'काम' का प्रभाव देखिये राम राज्य अभिषेक से पहले जाना चाहिए था दशरथ जी को कौशल्या के पास आ गए कैकई के पास जो कोप भवन में पड़ी हुई है। एक बे -अदबी दशरथ जी ने वशिष्ठ जी को राजमहल में बुलाकर की थी राम को सन्देश भिजवाने के लिए के जाओ राम को उपदेश करके आओ।बतलाओ -कल तुम्हारा राज्याभिषेक है आज की रात संयम से रहना। भेजना तो राम को गुरु के पास था के जाओ गुरु का आशीर्वाद लेकर आओ -कल तुम्हारा राज्याभिषेक है। काम उलटा ही किया गुरु वशिष्ठ को ही बुला भेजा राम के भवन में संदेशा लेकर जाने के लिए। रघुकुल रीति सदा चली आई , प्राण जाए पर वचन न जाई।. If you liked or unliked Vijay kaushal ji maharaj ram katha pravachan music, please for Vijay kaushal ji maharaj ram katha pravachan's hd mp4 videos or mp3 songs as per as below comment box. नेति नेति कहि महिमा गावे वेदहु याको पार न पायो , वो बेटा बन आयो ,उज्जैनी नगरी में , उज्जैनी नगरी में। वेदहु बन के आयो ,उज्जैनी नगरी में। कौशल्या सुत जायो ,उज्जैनी नगरी में। अरे घर घर बजत बढ़ायो ,उज्जैनी नगरी में। नाँचहिं गावहिं दे दे तारी ,उज्जैनी नगरी में। भगवान् राम का जन्म हो गया है अवध में जश्न का माहौल है : जो जैसे बैठहि उठी धावा - जैसे ही राजमहल के वाद्य यंत्र बजाये गये अटारियों से-जो जैसे भी स्थिति में था ,जहां भी बैठा था , जैसे भी था उठकर दौड़ा। भगवान् से मिलने के लिए किसी तैयारी की आवश्यकता नहीं है। उपासना का सार तत्व है उल्लेखित चौपाई में।यही भगवान् से मिलने की आचार संहिता है। भगवान् से मिलने के लिए सिर्फ अपनी स्थिति बदलिए कुछ छोड़ने की जरूरत नहीं है बस अच्छे लोगों का संग साथ कीजिये बुरे आपको छोड़के स्वत : ही चले जाएंगे। संसार के काम में व्यवहार चाहिए भजन में स्वार्थ। भजन सबका अपना अपना जो कर ले सो तरे.

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Vijay Kaushal Ji Maharaj Ram Katha

vijay kaushal ji maharaj ki ram katha

Our music collection is updated daily, so that every visitor is able to find the song or album of his interest. बीच, सिया -कुमारी सखिन संग ,आईं जनक की लली. सन्दर्भ -सामिग्री : १ Vijay Kaushal Ji Maharaj Shree Ram Katha Ujjain Day 10 Part 2. In addition, you have an ability to listen to mp3 ram katha by vijay kaushal ji maharaj online or listen to online radio. Tags: Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 Video Songs, Video, Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 bollywood movie video, 3gp Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 video Download, mp4 Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 hindi movie songs download, Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 2015 all video download, Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 Hd Video Songs, Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 full song download, Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012, Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 pagalword, Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012 songs. भगवान को राणा जी ने जैसे ही देखा शरीर छोड़ दिया। अब मीरा के ऊपर राणा विक्रम सिंह ने कहर बरपा -ये जो बहुत ही क्रूर शासक थे और मीरा जी से बेहद खफा रहते थे तरह तरह से इन्हें सताने के लिए बाकी परिवारियों और अन्य कर्मियों से कहा। मीरा ने मौन व्रत ले लिया। रहिमन चुप घर बैठिये देख दिनन के फेर एक बार चरणामृत है कहकर पुजारियों की मिलीभगत से इन्हें विष का प्याला पीने के लिए दिया गया। मीरा जानतीं थी ये विष है लेकिन उन्होंने कहा घनश्याम आज इस रूप में इस प्याले में आ गए। और सचमुच उस कथित चरणामृत के प्याले में इन्हें कृष्ण का श्याम रूप उनके सांवले सलोने नेत्र दिखलाई दिए। जहर पीया मीरा ने यहां और वहां द्वारका में झाग कृष्ण के मुख से आने लगे। मीरा के पास जो श्याम सुंदर की मूर्ती थी वह थोड़ी और काली पड़ गई।मीरा ज़िंदा रहीं मरी नहीं। अब विक्रम सिंह ने नित्य नै नै युक्तियाँ सोचनी शुरू कीं । एक षड्यंत्र के तहत काला नाग कोबरा दिवाली की भेंट स्वरूप मीरा तक पहुंचाने का सोच लिया। भक्त को देख कर जहरीले जंतु भी अपना स्वभाव बदल लेते हैं। कोबरा भेंट किया गया था मीरा जी को राणा विक्रम द्वारा दिवाली पर छल छद्म से ,पूर्व में जहर का प्याला चरणामृत बतलाकार दिया गया था। मीरा फिर बच गईं।सांप संतों से कुछ नहीं कहते वे जानते हैं ये तो प्रेम के पात्र हैं। सांप छोटे बच्चे को भी कभी नहीं डसते।सर्प आदमी की तरह खतरनाक नहीं होते , शंकर जी इसी लिए भोले नाथ कहलाते हैं जिनके गले में सर्प मालाएं झूलतीं हैं ,जो हँसते -हँसते विषपान कर गए थे और अमृत देवताओं तक पहुंचा था। विष भी अमृत बन जाता है असाधारण पात्र में आकर। और अमृत भी विष बन जाता है विकार युक्त पात्र में आ कर ,यही मीरा जी के जीवन का सन्देश है। नींद आनी बंद हो गई मीरा जी को गिरधर के विरह में - नींद नसानी होय मेरी , सखी री मेरी नींद न सानी हो। ज्यों चातक घन कू रटै , मछली बिन पानी हो ,सखी री मेरी , सखी री मेरी नींद न सानी हो। अंतर- वेदन विरह की, पीड़ न जानी कोय । अंग अंग व्याकुल भई, दासी मीरा विरह की सुध बुध बिसरानी हो , सखी री मेरी नींद न सानी हो। तीन दिन से मीरा सोयी नहीं हैं प्रेम - विरह की ज्वाला में ,सखी को अपनी व्याकुलता बतलाती हैं -अब उनको कोई गफलत नहीं है -सब कुछ स्पष्ट हो गया है नींद इन अर्थों में उड़ी है। मीरा जाग गईं हैं। ये वेदना वह है जिससे जीवन में ज्ञान का जन्म होता है धर्म का जन्म होता है वेद का जन्म होता है। वेद का मतलब ज्ञान ही तो होता है। दोनों सखियाँ बात कर रहीं थी। वास्तव में मीरा कृष्ण की मूर्ती से अपने कक्ष में बातें करतीं थीं। किसी ने राणा विक्रम सिंह जी से शिकायत की राणा आधी रात को उठकर तलवार लेकर मीरा के कक्ष में आ गए -पूछा कौन पुरुष था तुम्हारे कक्ष में? Also Anyone can download Vijay kaushal ji maharaj ram katha pravachan's newest and oldest mp3,hd mp4 songs.

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Vijay Kaushal Ram Katha Full 2012

vijay kaushal ji maharaj ki ram katha

आज समाज में वह बड़ा माना जाता है जिसके सामने सब छोटे दिखाई दें। आ गया सम्पर्क में जो ,धन्यता पा गया - इधर श्री किशोरी जी का सखियों के साथ वाटिका में प्रवेश हो रहा है। उधर भगवान् ने वाटिका में प्रवेश लिया है। पूजन की करने तैयारी , सखिन संग आई जनक लली. हाँ तैयार है : महाराज फिर बोले राघव कहाँ है? मुझे बताओ। संत अगर आता है तो समझिये पीछे -पीछे राम जी भी आ रहें हैं। जनक के हाथ जुड़ गए भगवान को देखकर। विश्वामित्र जी से बात करना भूल गए जनक जी। मुनि कुल तिलक के नृप कुल पालक ब्रह्म जो कही नेति कही गावा इन्हहिं बिलोकत अति अनुरागा , बरबस ब्रह्म सुकहिं मन जागा। विदेह देह में डूब गये। जो वस्तु ,व्यक्ति और विषय से प्रसन्न या अप्रसन्न होता है वह संसारी है ,जो असुरक्षा में जीता है वह संसारी है। जो निश्चिन्त रहता है हर हाल में मधुकरि या भिक्षा मिले या न मिले ,जिसकी प्रसन्नता या अप्रसन्नता किसी वस्तु विषय या व्यक्ति से नहीं जुडी है वह साधु है।जो परिश्थितियों की सवारी करता है ,जो आज के आनंद में है वह साधु है। जो परिस्थितियों से विचलित होता है वह संसारी है। सीता राम ,सीता राम ,सीता राम कहिये , जाहि विधि राखै राम, ताहि विधि रहिये. सब प्रकार के पाप का नाश करने वाली गंगा जी हैं। भक्ति कथा के बिना नहीं आएगी। भगवान् सारे रास्ता कथा ही सुनते जा रहे हैं।अभी गौतम जी की स्त्री की कथा सुनी अब गंगा जी की कथा सुन रहे हैं। क्षिप्राजी गंगा जी की सगी बहन हैं क्षिप्रा जी भगवान् विष्णु के हृदय से निकलीं हैं और गंगा श्री चरणों से। प्रतिदिन गंगा में स्नान कीजिये। हरिद्वार उज्जैन को आप घर बुला सकते हो। वहां जाने की जरूरत नहीं है।कहीं भी नहाइये बस गंगा जी का आवाहन करिये हर- हर गंगे जैशिवशंकर। हर -हर गंगे जैशिवशंकर। अगर इतना बोलते हुए आपने स्नान किया तो आपको लगेगा उज्जैनी ही नहाकर आये हैं हर की पौड़ी ही से नहाकर आये हैं।आखिर बाथ रूम में आप मौज़ में होते हैं कुछ न कुछ हर व्यक्ति गाता ही है। चुपचाप नहीं नहाता है मुक्त होता है स्नानघर में आदमी।नित्य अपनी बाल्टी में बुलाओ गंगा जी को। कुछ न कुछ गंगा धाम पर जाकर दान करिये चाहे एक कप चाय ही पिला दो किसी साधू को। एक छोटी बुराई आप जो छोड़ सकते हैं ज़रूर छोड़िये।ये माँ है गंगा और क्षिप्रा इसकी सगी बहिन है और हर माँ यह चाहती है मेरा बेटा बाप की गोद में जाए। कभी भी बाप गंदे बच्चे को गोद में नहीं रखता मैले कुचैले बच्चे को नहीं उठाता, जगत का पिता भी : मोहि कपट छल छिद्र न भावा , निर्मल मन जन सो मोहि पावा। माँ ही बच्चे को निर्मल करती है उसका मलमूत्र धौती है ताकि बच्चा नहाकर बाप की गोद में जा सके । रास्ते में एक बहुत सुन्दर बागीचा पड़ता है राम लक्ष्मण जी के साथ विश्वामित्र वहीँ ठहर जाते हैं। समाचार जनक जी को पता चलता है : विश्वामित्र महामुनि आये , समाचार मिथिला पति पाये । जैसे ही जनक जी को पता चला सेवक सचिव अपने भाई को लेकर बागीचे में आये। संतों के दर्शन अगर आपके शहर में आये हैं उनके दर्शन ज़रूर करिये। क्योंकि संत भगवान् के पार्षद होते हैं। जब संत मिलन हो जाये , तेरी वाणी हरि गुण गाये , तब इतना समझ लेना , अब हरि से मिलन होगा। बाग़ में दर्शन करने आये जनक जी बोले -गुरुवर मुझे तो स्मरण नहीं होता मैंने कभी कोई पुण्य किया है ज़रूर मेरे पूर्वजों का पुण्य होगा जो आप मेरे नगर में आये।आपका मुझे दर्शन हो गया राघव के रूप का जादू निर्गुण निराकार पर चल गया -जनक पूछने लगे ये दोनों बालक हैं या पालक हैं? रूपगोस्वामी रहते थे उन दिनों निधि वन में, जिनका आदेश था निधिवन में किसी महिला को प्रवेश न करने दिया जाए। राणा ने यहां वृन्दावन में भी अपने लोगों को भेजकर मीरा को बहुत सताया आखिर में मीरा वृन्दावन भी छोड़कर द्वारिका चली गईं। इसी बीच विक्रम राणा की मृत्यु हो गई। अब राणा उदय सिंह जी ,जो पूजा पाठ की वृत्ति वाले महात्मा थे, और सबसे बड़े भी थे लेकिन विक्रम सिंह के आगे उनकी एक नहीं चलती थी सब कुछ काम संभालने लगे। सारा राज कारज सम्भाला। मीरा को मेवाड़ वापस लाने के लिए राणा उदय सिंह कहते हैं हम लोग तो इस काबिल भी नहीं रहे उन्हें वापस आने के लिए कहें हमारे विक्रम राणा और उनके साथियों ने मिलकर उन्हें इतना सताया है हम उन्हें किस मुंह से वापस आने के लिए कहें। हम लोग तो मेड़ता वासी मुंह दिखाने लायक भी न बचे। सब लोग द्वारका पहुँचते हैं. Additionally, the user, who passes registration, will gain new abilities: he will receive access to personal account with various useful features. Here you may download mp3 for free and without registration ram katha by vijay kaushal ji maharaj. ऐसी नदी तो हमने स्वर्ग में भी नहीं देखी । गुरूजी कहते हैं गंगा को नहीं पहचानते आपके श्री कदमों से ही तो निकली है। भगवान् गंगा जी की कथा सुनना चाहते हैं। भगवान् अब गंगा की कथा सुनना चाहते हैं। जेहि प्रकार सुरसरि मुनि आई , राम बिलोकहिं गंग तरंगा , गंग सकल मुद मंगल मूला। सब सुख करनी हरणी सब शूला.

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Shri Ram Katha by Vijay Kaushal Maharaj 06

vijay kaushal ji maharaj ki ram katha

We have huge collection of unlimited Vijay kaushal ji mharaj ki full katha 's songs. भगवान् खड़े थे: शबरी देखि राम बिनि आये, मुनि के वचन समुझ जिये आये। साधु चरित शुभ चरित कपासू। साधु का कहा झूठ नहीं होता सत्य ही सिद्ध होता है। अरि शबरी देख! We provides Vijay kaushal ji maharaj ram katha pravachan's songs in formats like mp4, hd, webm, mkv, flv, wmv, 3gp, wav, mp3. Tags: Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi Video Songs, Video, Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi bollywood movie video, 3gp Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi video Download, mp4 Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi hindi movie songs download, Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi 2015 all video download, Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi Hd Video Songs, Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi full song download, Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi, Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi pagalword, Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj Fullvi songs. . मीरा जी ने किसी की नहीं सुनी लोगों ने उन्हें गाली दी मीरा ने उन्हें गीत दिया। जो जिसके पास होता है वह वही देता है। चरित्र करके दिखाया जाता है भगवान् राम यही करते हैं -माता ,पिता ,गुरु तीनों की चरण वंदना करते है प्रात : उठते ही। जिन मातु पिता की सेवा की , तिन तीरथ धाम कियो न कियो । जिनके हृदय श्री राम बसें , तिन और को नाम लियो न लियो। सन्देश यहां पर यही है कथा का -हुड़किये मत माता पिता को ,जो इनका अपमान करता है भगवान् उस से पीठ मोड़ लेते हैं। बूढ़ी माँ को बच्चों और अपनी पत्नी के सामने जो पुरुष फटकारता है ,उस माँ को प्रसव की पीड़ा याद आ जाती है। 'भादों के बरसे बिन ,माँ के परसे बिन' - पेट नहीं भरता है -धरती भी प्यासी रहती है। यशोदा को कृष्ण की तरह प्यार न कर पाओ कोई बात नहीं उसका अपमान तो मत करो। माँ भोजन नहीं करती है बालक के भूखे होने पर। संतान और माँ साथ -साथ पैदा होते हैं जब पहली संतान पैदा होती है माँ भी तो तभी माँ बनती है। माँ को कमसे कम इतना तो सोचने का मौक़ा दो -मेरा बेटा मेरा है। कुछ और न सही घर आने पर माँ का हाल चाल ही पूछ लीजिये। राम बचपन से इसी मर्यादा का पालन करते हैं। अब विश्वामित्र रिषी का प्रवेश हो रहा है कथा में : हरी बिन मरै नहीं निसिचर पाती मन का अपना स्वभाव है वह एक बार में एक ही काम कर सकता है -कथा सुन रहे हैं तो कथा ही सुनिए ,स्वेटर मत बनिये ,बीज मत छीलिए ,जबे मत तोड़िये। जो इन्द्रीय सक्रीय होती है मन उसी में जुड़ जाता है। सुनो तात मन चित लाई -कथा को ध्यान से सुनिए। कबीर कहते हैं : तेरी सुनत सुनत बन जाई , हरि कथा सुनाकर भाई। रंका तारा ,बंका तारा , तारा सगल कसाई , सुआ पढ़ावत गणिका तारी , तारी मीराबाईं , हरिकथा सुनाकर भाई। गज को तारा गीध को तारा , तारा सेज सकाई , नरसी धन्ना सारे तारे , तारी करमाबाई । जो कुछ हम कानों से सुनते हैं वही हमारे मन में बस जाता है। हनुमान चालीसा में इसका प्रमाण है प्रभु चरित्र सुनबै के रसिया राम लखन सीता मनबसिया. सत्य का आचरण करते -करते जिसके जीवन में भक्ति की बिंदी आ गई वही संत हो जाया करता है। साधू झूठ नहीं बोलता। भरोसा कर लिया शबरी ने भगवान् आयेंगे ,जिस समय भगवान् इनके द्वार पर आये ये अस्सी बरस की हो गई थीं ,भजन गा रहीं थीं ,पूजा में थीं ,गुरुदेव की चेतना इनके अंदर से बोल पड़ी -ओ सबरी देख? भजन परमुखापेक्षी नहीं होता -तू करे तो मैं करूँ। भजन को सबसे पहले नज़र लगती है ,कोई देखता है तो हँसता है लो जी देखो स्वामी जी को। इसीलिए कहा गया है भोजन और भजन एकांत में। कोई देख न ले छिपा कर करें भजन इसके प्रदर्शन की भी जरूरत नहीं है। भक्त को सूरदास की तरह होना चाहिए -विरह दग्ध -गोपियों की तरह विरह अग्नि में जलते सुलगते हुए होना चाहिए। आद्र और आर्त पुकार से मिलते हैं भगवान्। निसि दिन बरसत नैन हमारे , सदा रहत पावस ऋतु हम पर , जप ते श्याम सिधारे। कहते हैं यमुना का पानी तो मीठा था ,कृष्ण द्वारका गए तो पूरे ब्रजमंडल का पानी खारा हो गया ब्रज वासियों के अश्रु -जल से। ब्रज के बिरही लोग बिचारे , बिन गोपाल ठगे से सारे। ऊपर से कृष्ण के सखा आ गए अपना ज्ञान बघारने। विरह अग्नि को उत्तप्त करने। नंदबाबा के घर का रास्ता पूछते हैं -गोपियाँ कहती हैं हम तभी समझ गए थे -ये कोई कृष्ण की उतरन पहनने वाला बहरूपिया है जिसे नंदबाबा का घर नहीं मालूम। बोली इस नाली के संग -संग चला जा ,जहां जाकर ये खत्म हो वही नंद का घर है -वहीँ से निकलती है यह अश्रु -जल सिंचित धारा। आते ही तुमने हमारा जख्म कुरेद दिया। उद्धव कृष्ण के पुराने वस्त्र ही पहनते थे इतना प्रेम था उनको कृष्ण से।एक गोपी उन्हें दूर से देख बोली अपने कृष्ण आ रहे हैं दूसरी फ़ौरन उसकी बात काटते हुए बोली ,हमारे कृष्ण हमें देखवे के बाद रथ पे नहीं बैठे रहते रथ से उतर के दौड़े -दौड़े आते। ये कृष्ण नहीं हो सकते। कृष्ण लीलाएं गोपियाँ याद करती हैं : अरे तेरो कुंवर कन्हैया मैया, छेड़े मोहि डगरिया में , जल भरने यमुना तट जाऊँ , ये तो कंकर मारे गगरिया में। तमाम लीलाएं कृष्ण की गोपियों को सताने आने लगीं उद्धव जी को देख के। वैसा सा ही रूप बनाये थे। उपासना के सूत्र का प्रसंग देखिये - महाराज दशरथ राजमहल में आये भोजन करने -भोजन तैयार है पूछते हैं कौशल्या जी से? At your service is fast music search, which is available with the help of convenient website navigation.

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Ram Katha Vijay Kaushal Ji Maharaj 501 By Shri Darsha Video

vijay kaushal ji maharaj ki ram katha

If You are unable to download Vijay kaushal ji mharaj ki full katha song , please. निर्मल नीर नहाई सरोवर , अरे शिवजी के मंदिर पधारीं , सखिन संग ,आईं जनक लली। अब शादी कल करेंगे ,आज की कथा को विराम देते हैं। जयश्री राम! भोग बसें हैं मन में ,तो भोग को ही खोजोगे ,भगवान बसे हैं तो भगवान् को खोजोगे ,भगवान् की खोज संतों के मिलन से पूरी होती है। बिनु हरिकृपा मिलहिं नहीं संता , सतसंग भी कुसंग की तरह संक्रामक होता है।इसकी virility का अंदाज़ा नहीं लगा सकते आप। जब संत मिलन हो जाये ,तेरी वाणी हरिगुण गाये, तब इतना समझ लेना, अब हरी से मिलन होगा। जब संत मिलन हो जाये ,तेरी वाणी हरिगुण गाये , आँखों से आंसू आये , तेरा मन गदगद हो जाये , दर्शन को मन ललचाये , कोई और न मन को भाये , तब इतना समझ लेना , अब हरी से मिलन होगा। कथा सुन ने की लालसा है तो कोई न कोई संत भी मिल ही जाएगा। चाय पीने की लालसा है तो कोई खोखा भी चाय का मिल ही जाएगा। विश्वामित्र -राम के भक्त बड़े पुरुषार्थी तपस्वी महात्मा हैं। लेकिन निशाचरों से मुक्त न हो पाए।इन्होनें त्रिशंकु नाम के राजा को सशरीर स्वर्ग में भेज दिया नियम विरुद्ध जब देवताओं ने विरोध किया तो एक नए स्वर्ग की ही रचना कर दी लेकिन निशाचरों से मुक्त नहीं हो पाए। हथियार डाल दिए ,यज्ञादिक अनुष्ठान छोड़ दिए। निशाचर कोई व्यक्ति नहीं है वृत्ति है।आदतों को प्रवृत्ति को नहीं कहते निशाचर । वह नहीं हैं ये जिन्हें हम राक्षस समझते हैं। निसाचर योनि नहीं है ,जो आदतें आपको निशि में विचरण कराती हैं निशाचरण कराती हैं।वे आदतें जो हम को उजाले से अँधेरे में ले जाती हैं ये आदतें संतों को भी सतातीं हैं। बीमारी सताती नहीं हैं दुष्प्रवृत्तियाँ सताती हैं - सताती मतलब -सतत ,एक पल भी नहीं छोड़तीं दुष्प्रवृत्तियाँ। बुराई को भगवान ही दूर कर सकते हैं। अच्छों के पास बैठो।बुराई से कोई अनुष्ठान ,पूजा पाठ नहीं बचाता है ,रोग तो औषधि से दूर होगा ,जब मनुष्य का सिर खाली रहेगा उसे बुराई से कोई बचा नहीं सकता। माता पिता को सर पे रखिये ,गृहस्थी होने पर अपने छोटे बच्चों को अपने सर पे बिठाइये -वे मेरे इस आचरण के बारे में क्या सोचेंगे जो मैं करने जा रहा हूँ । करने से पहले सोच लें। हरिबिनु मरै न निसचर पापी पाती केहि कारण आगमन तुम्हारा , कहउँ सो करदन बाहउ वारा? मीरा मन ही मन सोचने लगीं जब उन्हें सेवकों ने निधिवन में आने से रोका : ब्रज में केवल एक पुरुष है कृष्ण -ये दूसरा कहाँ से आ गया जो मेरा प्रवेश निधि वन में रोक रहा है? If you liked or unliked Vijay kaushal ji mharaj ki full katha music, please for Vijay kaushal ji mharaj ki full katha's hd mp4 videos or mp3 songs as per as below comment box. दशरथ जी ने जब पूछा विश्वामित्र से- बोले विश्वामित्र रोते हुए मैं तुमसे भीख मांगने आया हूँ - असुर समूह सतावन. मैं आपकी छाया हूँ। जिय बिनु देह नदी बिन वारि , तैसीहि नाथ पुरुष बिन नारी। पति के बिना पत्नी वैसे ही अर्थहीन है जैसे नदी जल के बिना ,प्राण के बिना शरीर।इतने में ही लक्ष्मण जी भी आ गए -बोले भगवान् आप किसे समझा रहे हैं मेरे तो माता पिता सिर्फ आप ही हैं मैं किसी पिता दशरथ और माता सुमित्रा को नहीं जानता। बड़ा रोचक प्रसंग है लक्ष्मण जी के जन्म के बारे में पैदा तो चारों बच्चे एक साथ ही लगभग लगभग हुए थे लेकिन पैदा होने के बाद लक्ष्मण जी ने कई दिनों तक न आँख खोली न दूध पीते थे ,बेहद रोते रहते थे न सोते थे न दूध पीते थे बस रोना ही रोना। सुमित्रा जी चिंतित होकर लक्ष्मण जी को लेकर गुरु वशिष्ठ जी के पास गईं ,सारी बात बतलाई। गुरु ने लक्ष्मण जी को ध्यान से देखा और बोले अरे! We have huge collection of unlimited Vijay kaushal ji maharaj ram katha pravachan 's songs. .

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Shri Vijay Kaushal Ji Maharaj On Hanuman Katha Day 1

vijay kaushal ji maharaj ki ram katha

मैं याचन आयो नृपत भगवान् राम खड़े थे उन्होंने तभी निर्णय ले लिया मेरे पिता के राज्य में ऋषि रो रहें हैं। भगवान् ने तभी प्रतिज्ञा कर ली ,मेरे राज्य में कोई दुखी नहीं रहेगा ,किसी ऋषि तपस्वी को रोना नहीं पड़ेगा । साधू! If You are unable to download Vijay kaushal ji maharaj ram katha pravachan song , please. . . . .

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Shri Ram Katha by Vijay Kaushal Maharaj 06

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Ram Katha

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